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बिहार के विश्वविद्यालयों में शिक्षकों के साढ़े सात हजार पद रिक्त, जल्द होगी बहाली
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राज्य सरकार प्रदेश के विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में शिक्षकों के खाली पदों को देखते हुए जल्द से जल्द विश्वविद्यालय सेवा आयोग को अस्तित्व में लाना चाहती है। पटना [राज्य ब्यूरो]। राज्य सरकार प्रदेश के विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में शिक्षकों के खाली पदों को देखते हुए जल्द से जल्द विश्वविद्यालय सेवा आयोग को अस्तित्व में लाना चाहती है। इसके लिए उच्च शिक्षा विभाग ने कवायद शुरू कर दी है। संभावना जताई गई है कि अक्टूबर नवंबर तक आयोग के अध्यक्ष व सदस्यों का चयन किया जा सकता है। आयोग के अस्तित्व में आने के साथ ही विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में शिक्षकों के रिक्त साठ फीसद पदों को भरने की कवायद शुरू होगी। उच्च शिक्षा विभाग से मिली जानकारी के मुताबिक आयोग सात सदस्यीय होगा। जिसमें एक अध्यक्ष तथा छह सदस्य होंगे। आयोग के अध्यक्ष का दायित्व किसी पूर्व कुलपति, प्रोफेसर या मुख्य सचिव रैंक के अधिकारी को सौंपा जाएगा। प्रोफेसर के पास पन्द्रह वर्षों का कार्य अनुभव होने के आधार पर यह दायित्व दिया जा सकेगा। आयोग के छह सदस्यों में से तीन प्रोफेसर होंगे शेष तीन प्रशासनिक अधिकारी होंगे। यह अधिकारी संयुक्त सचिव या उससे ऊपर के संवर्ग के होंगे। सूत्रों का कहना है कि आयोग के अस्तित्व में आते ही उसे पहला दायित्व शिक्षक नियुक्ति का सौंपा जाएगा। क्योंकि अभी स्थिति यह है कि विश्वविद्यालयों में शिक्षक के करीब 7485 पद खाली हैं। इतनी बड़ी संख्या में शिक्षकों के न होने का असर सीधे सीधे छात्रों की पढ़ाई पर पड़ रहा है। यह भी पढ़ें: लालू की पुकार से पहले नरेंद्र मोदी करेंगे बिहारियों का दिल जीतने का प्रयास आयोग के गठन के पूर्व यदि बिहार लोक सेवा आयोग 2014 से चल रही सहायक प्राध्यापक की नियुक्ति की प्रक्रिया पूरी भी कर लेता है तब भी विवि और कॉलेजों में डेढ़ हजार से अधिक पद रिक्त रह जाएंगे। समस्या को देखते हुए उच्च शिक्षा विभाग प्रयास में है कि आयोग जल्द से जल्द कार्य करने लगे।